नश्वर है संसार यहाँ पर इंसानों की कहाँ चली,
अपना कर्म करो बाकी सब देखेंगे बजरंगबली।
वनवासी थे राम कहाँ था उनके पास कोई साधन,
सोचो, क्या होता यदि उनको ना मिलते बजरंगबली।
कालनेमि त्रेता में भी थे और आज भी मिलते हैं,
पर उनको पहचान ठिकाने लाएंगे बजरंगबली।
हरा सिया का शोक अशोक तले उनको धीरज देकर,
धरो उन्हीं का ध्यान तुम्हें धीरज देंगे बजरंगबली।
रावण की प्रवृत्ति हर युग में कदम - कदम पर मिलती है,
बज्र मुष्टिका तान संभालेंगे सब कुछ बजरंगबली।
- ओमप्रकाश तिवारी
( दीपू के 30वें जन्मदिन 19 अक्टूबर, 2026 को सुबह पांच बजे )

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