चिस्ती साहब मुंह ना खोलो,
मुंह खोलो तो सच ना बोलो ।
किसको प्यारा भाईचारा,
राजनीति की गिरह न खोलो ।
तोल रहे हैं सब जन जिनकी,
तोल सको तो तुम भी तोलो ।
गिर जाते हैं अकड़ू पौधे,
चलो हवा के संग-संग डोलो ।
डायबिटिक होती है शक्कर,
नीम करेले का रस घोलो ।
आप पिटे तो चुप हैं सारे,
बोलो भाई कुछ तो बोलो ।
- ओमप्रकाश तिवारी
Sunday, October 17, 2010
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